
एक स्वस्थ शरीर की स्वामिनी स्त्री अपने सकारात्मक मनोभावों और स्वस्थ शरीर के अंग-प्रत्यंगों के संतुलित गठन के कारण भीड़ में भी आकर्षक दिखने के कारण सबका ध्यान आकर्षित कर लेती है |
यह आकर्षण उसके व्यक्तित्व में निहित होता है | इस व्यक्तित्व को स्त्री अपनी सकारात्मक मनोवृतियों से प्राप्त करती हैं | मनोवृतियाँ स्त्री का खानपान, रहन-सहन, चाल-चलन, पहनावा, और बोलचाल को निर्धारित करती हैं |
मनोवृत्तियां ही स्त्रियों की रुचियों को भी तय करती हैं –
यहां तक कि मनोवृत्तियां ही स्त्रियों की रुचियों को भी तय करती हैं | जो स्त्रियों के भावात्मक एवं मानसिक अनुभवों से जुड़ी होती हैं | जो स्त्रियों को यौन संबंधों को स्वीकार करने समझने और उनके लिए निर्णय लेने में सहायक होते हैं | स्त्री के व्यक्तित्व के निर्माण में सकारात्मक सोच से निर्मित उसकी मनोवृत्तियां उसके शारीरिक विकास में सहायक होती हैं | स्वस्थ शरीर उन्नत विकसित अंग प्रत्यंगओं का गठन उसके व्यक्तित्व को और भी चमकीला बना देता है | इसलिए प्रायः देखा जाता है कि सुंदर स्त्री की अपेक्षा आकर्षक स्त्री की पहुंच पुरुषों में अधिक होती है |
आत्मविश्वास –

शारीरिक संरचना में ही इसके कामसुख की भावना निहित होती है | जो उसकी मनोवृत्तियों द्वारा संचालित होती है या यूं कहा जा सकता है मनोवृत्तियां स्त्री की भावनाओं आईना होती है | विकसित उन्नत उरोज, संतुलित लंबाई, और स्वस्थ शरीर जहां स्त्री को आत्मविश्वास प्रदान करता है वहीं पुरुषों को उसके लिए लालायित करता है | भावुकता सामान्य पुरुषों की तुलना में स्त्रियां में अधिक होती है | इसलिए स्त्रियां उस पुरुष के साथ उन्मुक्त होती हैं जो उसकी संवेदनाएं और भावनाओं के अनुरूप होते हैं | अर्थात जो पुरुषों की स्त्री की भावनाओं के अनुरूप व्यवहार करते हैं वह स्त्रियों के लिए आसानी से स्वीकार होते हैं | इसलिए स्त्रियाँ उन पुरुषों को अपना सर्वस्व प्रदान कर देती हैं | आत्मविश्वास से लवरेज स्त्री सामाजिक कार्यों, सेवा क्षेत्रों, व्यवसाय तथा विभिन्न क्षेत्रों आदि में नारी शक्ति को प्रदर्शित करती हुई लोक कल्याण के लिए प्रेरित होती है |
स्त्री में भावनाएं और यौनसुख की प्राप्ति की कामना

किन्तु किसी स्त्री में भावनाएं और यौनसुख की प्राप्ति की कामना भी होती है | किंतु अपनी सकारात्मक मनोविज्ञान निर्णय लेने की क्षमता के कारण स्त्री और पुरुष के प्रभाव में नहीं आती और सामाजिक वर्जनाओं और मर्यादाओं के अनुरूप निर्णय लेकर अपने व्यक्तित्व को उच्चतम स्तर पर ले जाने में सक्षम होती है | इसके विपरीत भावनाओं के वशीभूत स्त्रियां एवं सुख को प्रमुखता देने वाली स्त्रियाँ किसी भी पुरुष के प्रभाव में आसानी से आ जाती हैं | प्रायः पुरुष स्त्री की इस भावनात्मक कमजोरी का लाभ उठाते हुए इस समाज में देखे जाते हैं |
स्त्री की शारीरिक संरचना –

सामान्यतः स्त्री के अंगों में उसके उन्नत स्तन पुरुषों को सर्वाधिक आकर्षित करते हैं तथा उसके संतुलित शरीर में उसकी कमर और नितंब और वस्त्रों में इनकी दृश्यता किसी भी स्त्री के लिए आत्मविश्वास प्रदान करती है | और प्रत्येक पुरुष को भी उसके संसर्ग के लिए लालायित करती है |
यौनसुख –
यौनसुख आदान-प्रदान की वस्तु है | यह प्राप्त करने से या छीन कर नहीं लिया जा सकता इसके लिए दूसरे सहयोगी की इच्छा के विपरीत प्राप्त करने के प्रयास को ही बलात्कार कहा जाता है | यौनसुख का चरमोत्कर्ष एक दूसरे को संतुष्टि प्रदान करने से प्राप्त होता है | इस चरम को प्राप्त करने के लिए स्त्री-पुरुष एक दूसरे को समर्पित भाव से अपना सर्वस्व प्रदान करते है | इन संबंधों को स्त्रियां अपनी मनोवृत्तियों और रुचियों के कारण स्वीकार करती हैं |
निष्कर्ष –
अपने स्वस्थ शरीर के आकर्षक कामुक अंगों के माध्यम से पुरुष को यौन आनंद प्राप्त कराने में समर्थ होती हैं | स्त्री के अंग-प्रत्यंगों का उपभोग कर पुरुष अपना समस्त पौरुष स्त्री को प्रदान करता है | इस प्रकार आनंद के चरम सुख की स्थिति को प्राप्त करते हैं,एक दूसरे को कराते हैं |
सारांश यह कहा जा सकता है कि स्वस्थ शरीर में सकारात्मक सोच की स्वामिनी स्त्री हर प्रकार से सक्षम होती है | वह अपने समाज, परिवार के लिए उचित निर्णय ले सकती है | यौनसुख में पुरुष को तृप्त करने में समर्थ होती है | इसलिए स्त्री में आत्मविश्वास होना अति आवश्यक है जो उसे सकारात्मक सोच और स्वस्थ शरीर से मिलता है |
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